Aayi Panthi Nath

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शिव साधना

shivjiकई बार ऐसा होता है की हम आर्थिक रूप से संपन्न नहीं होते और हमारी इच्छाएं बहुत बड़ी होती है ! उन इच्छाओं को पूरा करने के लिए हमारे पास प्रयाप्त धन नहीं होता,हमारी इच्छाएं अन्दर ही अन्दर दबकर रह जाती है ! मेरे गुरुदेव का कहना था धन के अभाव में मानव धर्म का पालन भी नहीं कर सकता, क्योंकि चार पुरुषार्थों में एक अर्थ है ! अर्थ धर्म का सहायक है और धर्म मोक्ष का सहायक है ! धन से ही कामनाओं की पूर्ती होती है इसलिए धन काम का भी सहायक है ! आज मै आपके सामने एक ऐसा ही प्रयोग रख रहा हूँ जो निश्चित रूप से आपकी समस्या का समाधान करने में सक्षम है और ये मेरा अनुभूत प्रयोग है !

जब मैंने धन की कामना से भगवान शिव के इस प्रयोग को शुरू किया तो मुझे अनेक प्रकार की अनुभुतिया हुई,लगभग तीसरे दिन ही जब मैंने मन्त्र जप के बाद आंख खोली तो सामने दीवार पर एक लाइन में सात नंबर लिखे हुए नज़र आये,मैंने उन नंबरों को एक कागज़ पर लिख लिया और दुसरे दिन जब मैंने पता किया तो उनमे से एक नंबर सट्टे में खुल गया था,बाकि बचे हुए नंबर मैंने अपने दोस्तों को बाँट दिए और अगले छे दिन वोही नम्बर आते रहे ! सबसे बड़ी बात ये साधना एक सोम्य साधना है और घर पर की जाती है यदि वीच में छूट जाये तब भी कोई नुकसान नहीं होता !

||  साधना विधि  ||
इस साधना में किसी विशेष विधि विधान की जरूरत नहीं है ! आप हररोज सुबह मंदिर में शिवलिंग पर दूध जल और बेलपत्र चढ़ाएं और घर आकर २ घंटे मन्त्र जप करे ! रात को १० बजे गऊ के घी का दीपक जलाये और गुरु पूजन और गणेश पूजन के बाद मन्त्र जाप शुरू कर दे ! दो घंटे पन्द्रह मिनट ( २ घंटे १५ मिनट ) तक जप करे ! यह क्रिया आपको ४१ दिन करनी है !

||  मन्त्र  ||

 आद अंत धरती
आद अंत परमात्मा
दोना वीच बैठे शिवजी महात्मा
खोल घड़ा दे दडा
देखा शिवजी महाराज
तेरे शब्द दा तमाशा

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जय सदगुरुदेव

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10 Comments

  1. sir agar ga ka doodh na mile toh kya kare marag darshan kijiye

    • Vikrantnath

      April 26, 2015 at 9:32 pm

      ना मिले ? विधि नहीं बदलेगी, दूध ढूंढों और करो

  2. गुरू जी प्रणाम
    गुरू जी आपको बार बार मेसिज किया फोन भी किया पर आप कहते हो कि बहुत जल्दी पर गुरू जी मैं बहुत परेशान हूँ। मेरी और मेरी पत्नी की कुंडली में गुरू ग्रह और शुक्र ग्रह एक साथ बैठे हैं और आपके लेख के अनुसार मैंने काणे ब्रह्माण को भी बहुत ढूंडा पर वह नही मिलें। और हमारे विद्वान पंडित भी हमे डरा रहे हैं।अब मेरी आस आप पर ही टीकि हुई हैं। कृपा कृपा कृपा करके जरूर कोई समाधान करे। जय सदगुरू देव। जय सिद्ध रक्खा राम जी। जय विक्रांत नाथ जी।

  3. sir is sadhna say such meein sate ka no mil sakta hai

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